हचिको कौन था? प्रोफेसर यूनो और हाचिको की कहानी

               हचिको और प्रोफेसर यूनो की कहानी
 

हचिको कौन था?

हचिको एक बहुत ही वफादार कुत्ता था जो अपने मालिक के लिए अपनी जान को भी गवा देता है। दरअसल यह अपने मालिक को एक पप्पी के रूप में मिला था। यह जापान का रहने वाला था। इसे छोटे पर ही बेचने के लिए दूसरे मे ले जाया जा रहा था और रास्ते मे इस पप्पी का पिजडा गिर गया और यह एक यूनो नाम के एक एग्रीकल्चर साइंस प्रोफेसर को मिला। जो उस पप्पी को उसके बड़े होने तक पालते रहे।


हचिको और प्रोफेसर की कहानी--

यह कहानी सन् 1924 की है यूनो नाम के एक एग्रीकल्चर प्रोफेसर थे। वह एक ईजीबूरो नाम के देश में लेक्चरर थे। दरअसल वे एक अटिका ब्रीड के एक कुत्ते को पालना चाहते थे। वे अपना कुछ पल पालतू डाॅग के साथ व्यतीत करना चाहते थे। एक दिन प्रोफेसर लेक्चरर देने के लिए ईजीबूरो जा रहे थे तब रास्ते में वे कुत्ते बेचने वाले गाडी को देखा, दरअसल उस गाडी में पपी थे वे पपी हाचिको अटिका ब्रीड के थे और प्रोफेसर को उन्ही डाॅग में से एक की जरूरत थी तभी एक पपी का पिजडा गाडी से नीचे गिर गया और प्रोफेसर ने उस पपी को उठा लिया और अपने घर वापस आ गये प्रोफेसर के घर आने से पपी रोज चिल्लाता रहता जिससे उनकी पत्नी नराज हो जाती और उसे दूसरे जगह छोड आने को कहती तब प्रोफेसर उसे डाग पालने के पास ले जाते, डाॅग पालने वाले ने उसे पालने से इंकार कर दिया क्योकि उसके पास जगह नही था तब प्रोफेसर यूनो उसे अपने दोस्त के घर ले जाते और उससे पूछते है कि यह कौन सा पपी है तब उनके दोस्त पपी के गले मे पडे लेटर को देखा वह जपानी भाषा में लिखा हुआ था और प्रोफेसर के दोस्त को जपानी भाषा पता था तब उन्होने बताया कि यह एक अटिको ब्रीड का हाची है दरअसल जापान के डाॅग को हाची कहते है। तब प्रोफेसर यूनो ने उस पपी को फिर से घर ले गये  उनकी पत्नी यह देखकर फिर नाराज हो गयी और उसे छोड आने को कहती है तब फिर प्रोफेसर यूनो ने उस पपी को बाहर एक कच्चे मकान में छोड देते है। तब प्रोफेसर यूनो  ने मौसम खराब होने के कारण रात में बारिश होने और गडगडाहट की आवाज सुनी और वे उस पपी को फिर अपने कमरे में ले आए। एक दिन पपी बड़ा हो गया और प्रोफेसर कुछ पल उसके साथ खेलते थे। एक दिन प्रोफेसर लेक्चरर के लिए स्टेशन जा रहे थे तब हाचिको भी उनके पीछे- पीछे जाता है स्टेशन पर पहुचते ही प्रोफेसर ने देखा की हाचिको भी उनके पीछे-2 आ गया है तब प्रोफेसर हाचिको को घर जाने के लिए कहते है हाचि घर नही आता तब प्रोफेसर यूनो ने हाची को लेकर घर लौट आए अगले दिन फिर वैसा ही हुआ।

अब हाचिको का प्रोफेसर को स्टेशन पर छोडना और शाम को घर ले आना हाचिको का आदत बन गया। वह अपने मालिक से बहुत करता और रोज की तरह उन्हे स्टेशन पर छोडना और शाम को घर ले आना उसका रोज का रूटीन बन गया।

एक दिन प्रोफेसर यूनो स्टेशन पर अपने हाचिको के साथ पहुचे  प्रोफेसर ने एक गेंद फेकी और हाचिको से उस गेंद को लाने के कहा और हाचिको उसे उठा कर ले आता है प्रोफेसर यूनो इसे देखकर हैरान हो जाते है क्योकि वह कभी भी ऐसा नही करता था लेकिन फिर बहुत खुश हुए। जब प्रोफेसर यूनो ट्रेन में बैठने के लिए चढे हाचिको जोर-2 से भौकने लगा यह देखकर हैरान हो और उतर कर उसे बडे प्यार से सहलाने लगे और फिर ट्रेन में चढकर चले गए। हाचिको भौकता ही रहा। जब प्रोफेसर लेक्चरर दे रहे थे अचानक उनकी तबीयत खराब हो गया और हटाटैक आने से उनकी वही पर मौत हो जाती है। हाचिको स्टेशन पर अपने मालिक का इंतजार करता लेकिन वे नही आते इस तरह वह रोज स्टेशन पर आता और प्रोफेसर के आने का इंतजार करता। तब उनकी पत्नी उसे घर ले जाती है  जब शाम हो जाता है तो फिर हाचिको स्टेशन पहुच जाता और ट्रेन से उतरने वाले के चेहरे को ध्यान से देखता लेकिन फिर भी प्रोफेसर यूनो वहानही आते इस तरह वह रोज प्रोफेसर को स्टेशन पर देखने जाता। 

अब वह खाना पीना छोड कर उसी स्टेशन पर अपने मालिक का इंतजार करते -2 एक दिन खुद को अपने मालिक के पास भेज देता है। आज भी हाचिको और प्रोफेसर यूनो के कहानी को याद करते है और आज भी उसी स्टेशन पर हाचिको और प्रोफेसर यूनो की मूर्ति बनी है।

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