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जनवरी, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Maa ki mamta story (एक बेटे और माॅ की कहानी)

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                    माॅ की ममता माॅ की ममता कैसी होती है--  माॅ की ममता क्या होती है अपने बच्चो के लिए, आप लोगो को जरूर पता होना चाहिए। जब कभी किसी बच्चे के ऊपर कोई मुसीबत आता है तो माॅ उस बेटे को मुसीबत से निकालने के लिए सबसे पहले पहुचती है। क्योकि उस वक्त माॅ का अपने बेटे के प्रति जो ममता होती है ना वह ममता उमड पडती है और अपने बेटे को मुसीबत से निकालने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देती है आखिर में अपने बच्चे को मुसीबत से निकाल ही देती है। जब कभी बच्चा निराश होता किसी चीज को न पाने से, तो माॅ कही न कही से बच्चे की माॅग को पूरी करती है क्योकि बच्चे के प्रति माॅ का प्यार होता है। माॅ अपने खुद भूखी रह जायेगी लेकिन अपने बच्चे को भूखा नही रहने देगी वह कही न कही से उस बच्चे के खाने का इंतजाम कर ही देगी, यह होता है माॅ का प्यार । माॅ की ममता कभी गलत नही होती है माॅ चाहे तो दुनिया की कायनात बदल देगी माॅ के प्यार में इतनी शक्ति होती है कि वह बडे से बडे मुसीबतों को चुटकियो में खत्म कर देगी। आपने कई बार  माॅ की ममता   के बारे में पढा और सुना होगा कि माॅ कभी अपने बच्चो के साथ गलत होता नही देख सकती

Sachin tendulkar hindi

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 सचिन तेदुंलकर का जीवन परिचय-- सचिन तेदुंलकर--                   Sachin tendulkar सचिन तेदुंलकर का जन्म मुबंई में 24 अप्रैल 1973 ई0 को हुआ था। उनके पिता का नाम रमेश तेदुंलकर था। जो मराठी भाषा के प्राध्यापक थे। इनके पिता अब इस दुनिया मे नही है। सचिन तेदुंलकर के तीन भाई और एक बहन है, सचिन अपने भाईयो और बहन से छोटे हैं।  सचिन तेदुंलकर बचपन से ही पढाई और खेलकूद के बहुत शौकिन थे। सचिन को खेलो में सबसे ज्यादा प्रिय टेनिस था। उन्हे टेनिस खेलना बहुत पसन्द था लेकिन फिर सचिन तेदुंलकर अपने बडे भाई के कहने पर किक्रेट की ओर मुड गए और कुछ दिनो मे इनका मन टेनिस से हटकर किक्रेट मे लगने लगा।   सचिन तेदुंलकर के बडे भाई अजित तेदुंलकर ने उन्हे मुम्बई के प्रसिध्द किक्रेट प्रशिक्षक रमाकंत आचरेकर के पास ले गये और कहे की मेरे भाई सचिन तेदुंलकर को किक्रेट सिखाने के लिए आपके पास आया हूॅ। सचिन तेदुंलकर उस समय मात्र ग्यारह साल के थे।  आचरेकर ने इन्हे देखते ही कहा कि यह बच्चा बहुत आगे जायेगा और आज उनकी बात सच हो गयी। अब सचिन तेदुंलकर अपने गुरू के प्ररामर्श से किक्रेट का अभ्यास मे जुट गये। अब कुछ सप्ताह बाद सचिन

Acharya hajari prasad dwivedi ka jivan parichay hindi

    आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी आज हम आपको आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के बारे में बताने जा रहे है।  जीवन-परिचय--- आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म सन् 1907 ई0 को बलिया जिले के दुबे का छपरा नामक गाॅव मे हुआ था। इनके  पिता का नाम अनमोल द्विवेदी और माता का नाम ज्योतिकली देवी था। इन्होने पढाई करके बहुत सारी उपाधी प्राप्त की थी। इहोने हिन्दी एवं संस्कृत भाषाओ का अध्धयन भी किया। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कई संस्थाओ में हिन्दी-विभाग के अध्यक्ष भी रहे।  जैसे-- "शान्ति-निकेतन", "काशी हिन्दू विश्वविघालय" और "पंजाब विश्वविघालय"। ये पढाई में इतने सफल थे कि कई विश्वविघालयो से उपाधि भी प्राप्त की थी और सम्मानित भी किये गये। जैसे-- सन् 1949 ई0 को 'लखनऊ विश्वविघालय' ने उन्हे डी0 लिट्0 तथा सन् 1957 ई0 को भारत सरकार ने उन्हे 'पद्म-भूषण'। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी उत्तर प्रदेश सरकार की "हिन्दी ग्रन्थ अकादमी" के अध्यक्ष भी रह चुके थे। इन्होने साहित्य- सेवा में भी बहुत योगदान दिया था। सन् 1979 ई0 को आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने

शिवाजी कौन थे?

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                             शिवाजी कौन थे?     आज मैं आप सभी को शिवाजी कौन थे   के बारे में बताऊगां। जिस प्रकार भारत के इतिहास में सभी महापुरूषो का नाम आता है उसी प्रकार शिवाजी का नाम भारत के इतिहास में दर्ज है। शिवाजी कौन थे  और उनका जन्म 4 मार्च सन् 1627 ई0 को महाराष्ट्र के शिवनेर के किले में हुआ था। इनके पिता का नाम शाहजी और माता का नाम जीजाबाई था। इनके पिता अहमदनगर की सेना में एक सैनिक थे और बहुत कडी मेहनत के बाद इन्होने वहा के सेना के सेनापति बन गए। लेकिन फिर कुछ महीने बाद शाहजी सेनापति का कार्य भार छोड कर बीजापुर के सुल्तान के पास नौकरी कर ली। शिवाजी जब लगभग दस वर्ष के हुए तब इनके पिता शाहजी ने दूसरा विवाह कर लिए। अब जीजाबाई शिवाजी को लेकर पूना चली गयी जहाॅ शिवाजी के दादाजी रहते थे और वही पर जीजाबाई ने शिवाजी का पालन-पोषण किया। जीजाबाई धर्म को बहुत मानती थी। वे धर्म पर भरोसा करती थी। उन्होने शिवाजी का शिक्षा-दीक्षा बहुत बखुबी से कराया। शिवाजी के दादाजी का नाम कोणदेव था। कोणदेव ने अपने साथ शिवाजी को शिक्षा के लिए ले जाते थे वहा पर शिवाजी ने सैनिक की शिक्षा प्राप्त की और भी घुड

तुलसीदास का जीवन परिचय हिन्दी में

 तुलसीदास का जीवन परिचय--- जीवन-परिचय-- तुलसीदास के जन्म को लेकर लोगो में बहुत मतभेद है किसी का मानना है कि तुलसीदास का जन्म सन् 1497ई0 को हुआ था और किसी का मानना है इनका जन्म सन् 1526 ई0 को हुआ था और किसी का मानना है कि इनका जन्म सन् 1532ई0 को हुआ था। आज तक पता नही है कि इनका जन्म किस सन् मे हुआ था। लेकिन इनका जन्म सन् 1532ई0 को माना जाता है और लोग यही पढते आ रहें हैं। तुलसीदास के पिता का नाम आत्माराम दूबे और माता का नाम हुलसी था। लोग कहते है कि इनके माता-पिता ने कुछ वर्ष की आयु में ही छोड दिया था और ये इधर-उधर भटकने लगे तब इन्हे एक बाबा मिले जिनका नाम बाबा नरहरिदास था उन्होने ही इनका पालन-पोषण किया और तुलसीदास के गुरू बाबा नरहरिदास ने इन्हे ज्ञान और भक्ति की शिक्षा दी। जब इनका उम्र कुछ वर्ष बीत गया तब इनकी शादी करा दिया गया। इनकी पत्नी का नाम रत्नावली था जो बहुत ही खूबसूरत थी। कहा जाता है कि तुलसीदास अपने पत्नी से बहुत डर के रहते थे इनकी पत्नी खूबसूरत और गुस्से स्वभाव की थी। एक इनकी पत्नी इन्हे गुस्से से बोल देती है और ये उन्हे छोडकर भक्ति में लीन हो गए और वही पर प्रभु की सेवा

कबीर दास का जीवन परिचय हिन्दी में

 कबीर दास का जीवन-परिचय-- जीवन-परिचय-   कबीर दास का जन्म एक विधवा ब्राहम्णी के परिवार में सन् 1398 ई0 को हुआ था। लेकिन वह विधवा औरत ने इन्हे एक तालाब के किनारे छोडकर चली गयी और अगले दिन एक जुलाहा बुनकर परिवार वहा पर कपडे धोने के वास्ते गये और तब उन्हे कबीर दास नदी के किनारे पडे मिले। तब जुलाहे परिवार ने इन्हे पाल-पोश कर बडा किया कबीर दास जी ने इन्हे अपना माता-पिता मानने लगे। इनके माता का नाम नीमा और पिता का नाम नीरू था और इन्होने ही कबीर का पालन-पोषण किये। कबीर जब कुछ बडे हुए तब इन्होने स्वामी रामानन्द के यहा छिक्षण प्राप्त करने के लिए चले और इन्ही को अपना गुरू मानने लगे। इनके बडे हो जाने पर नीरू और नीमा ने कबीर दास की शादी लोई नामक औरत से करा दिये। कबीर की पत्नी का नाम लोई था। फिर कुछ वर्ष बाद इनके दो बच्चे पैदा हुए। एक लडका और दूसरी लडकी जिनका नाम कमाल और कमाली रखा। लोगो का मानना है कि कबीर दास एक हिन्दू थे और लोगो का मानना है कि ये मुस्लिम थे। लोगो के बीच इनके जाति को लेकर मत-भेद है।  कहा जाता है कि जब इनका जन्म हुआ था तब इनके बारे में किसी को भी पता नही था और वह विधवा औरत इन्हे ल

रजिया सुल्तान कौन थी? रजिया सुल्तान की मृत्यु कब हुई?

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 रजिया सुल्तान कौन थी?  रजिया सुल्तान पहली मुस्लिम शासिका थी जो दिल्ली पर अपना अधिकार जमा लिया और 1236 ई0 को दिल्ली की गद्दी पर बैठी और सुल्तान कहलाने का हक अदा कर ली। रजिया सुल्तान इल्तुतमिश की पुत्री थी जो अपने पिता के मृत्यु के पश्चात ही दिल्ली की सुल्तान बनी लेकिन उसके पहले इल्तुतमिश का पुत्र दिल्ली की गद्दी पर बैठा लेकिन वह अपनी सुल्तानी नही दिखा पा रहा था इसलिए रजिया ने दिल्ली की गद्दी को संभालने के लिए ही बैठी।                  रजिया सुल्तान वह तीन साल तक दिल्ली पर राज की और यहाॅ तक वह स्त्रियो की पहनावे को भी छोड दी और एक पुरूष की तरह भेद-भाव करना उसकी आदत बन गयी वह युध्द में सेना का नेतृत्व भी करती थी। एक बार अमीरो ने फिर रजिया से युध्द करने कहा और युध्द मे अमीरो पराजित हुआ वह समझ गया कि स्त्री होने पर भी वह हार नही मान सकती। लेकिन तुर्को के सरदार ने षड्यंत्र रच कर उसे गद्दी से हटा ही दिया और फिर उसका भाई ओर दो भतीजे सुल्तान बने जो गद्दी को चलाने मे सक्षम नही थे। अब उनकी यह हाल देखकर इल्तुतमिश के सबसे छोटे पुत्र नासिरूद्दीन महमूद को दिल्ली की गद्दी पर बैठाया गया। रजिया सुल्त

चाणक्य की motivational कहानी हिन्दी में

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यह चाणक्य की motivational कहानी है जिसे पढने के बाद आप चाणक्य के हर चीज के बारे में जानने के लिए उत्सुक हो जायेगें।  चाणक्य की Motivational कहानी हिन्दी में- चाणक्य की motivational कहानी शुरू होती है जब उन्होने इस धरती पर जन्म लिया तब उनके पिता इस दुनिया से अलविदा ले लिए, तब उनकी माॅ ने उन्हे पाल-पोश कर बडा किया और बडे होने पर उनकी माॅ ने उन्हे तक्षशिला पढाई के लिए भेज दी जहाॅ पर उन्होने ज्ञान के साथ-साथ दर्शन का भी अध्धयन किया। चाणक्य बचपन से ही विद्वान थे।  जब चाणक्य और भी बडे हुए तो अपना जीवन व्यतीत करने के लिए पाटलिपुत्र चले गये और वहा घनानन्द के साम्राज्य में नौकरी कर ली। घनानन्द ने उन्हे पाटलिपुत्र की दानशाला का प्रबन्धक नियुक्त कर दिया और फिर कुछ दिन बाद चाणक्य को वहा से उनके गुस्सैल स्वभाव के कारण निकाल दिया गया। दरअसल चाणक्य बचपन से ही गुस्से स्वभाव के थे।  चाणक्य ने अपने अपमान का बदला लेने की कसम खायी और फिर वहा से चलते बने, रास्ते मे उनकी मुलाकात चन्द्रगुप्त से हुई और दोनो एक दूसरे के दोस्त बन गये। दरअसल चन्द्रगुप्त बलवान थे और चाणक्य विद्वान थे इसलिए इन्होने एक दूसरे से

भारत का सबसे बडा जासूस (रविन्द्र कोशिक) की कहानी

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                         भारत का सबसे बडा जासूस(ब्लैक टाइगर) क्या आपने भारत के सबसे बडे जासूस का नाम सुना है अगर नही तो इसे पढने के बाद आपको पता चल जायेगा। रविन्द्र कोशिक ऊर्फ नबी अहमद शाकिर जिन्होने अपने हुनसे इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया। आज अगर भारत का सबसे बडा जासूस का नाम पूछा जाए तो सबसे पहले इन्ही का नाम आता है (रविन्द्र कोशिक), क्योकि इन्होने शक्ल बदलने में महारथ हासिल की है। ये भारत के गुप्त एजेंट थे जो भारत को पाकिस्तान की कई खुफिया जानकारी देते थे। रविन्द्र कोशिक का इतिहास (कहानी)---- राजास्थान राज्य के श्री गंगानगर गाव में सन् 1952 ई को एक पण्डित के घर एक लडके ने जन्म लिया जिनका नाम रविन्द्र कोशिक था। रविन्द्र कोशिक ने बडे होते-2इतना कुछ सीख लिया कि उन्होने अपना नाम इतिहास के पन्नो में दर्ज करा लिया है। रविन्द्र कोशिक ने पढाई में बी काॅम, एम काॅम डिग्री भी हाशिल की और इनके पास एक्टिगं करना, शक्ल बदलना आदि जैसे हुनर भी थे। ये शक्ल बदलने में इतने माहिर थे कि अपने इस हुनर से किसी को भी चकमा दे सकते थे। उसके इस हुनर से इन्द्रिरा गाॅधी ने उसे ब्लैक टाइगर की उपाधि भी दी।

लैला-मजनू की सच्ची प्रेम कहानी

 यह एक सच्ची घटना है जिसे पढने के बाद आपको भी प्यार पर पूरा भरोसा हो जायेगा कि प्यार कभी भी पूरा नही हो सकता है। यह घटना लैला-मजनू के प्यार की है। लैला-मजनू कौन थे? लैला-मजनू को कौन नही जानता है जो प्यार के एक मिसाल है जिन्हे आज भी लोग याद करते है। अमारी शाह के बेटे कैस जिन्हे पूरी दूनिया आज मजनू के नाम से जानती है और नाज्द शाह की बेटी जिन्हे लैला के नाम से जाना जाता है लैला-मजनू का प्यार आज भी पूरा दुनिया याद करता है यह दोनो सिधं प्रातं के रहने वाले थे। यह 11वी शदी की कहानी है भारत और पाकिस्तान की सीमा पर गंगापुर जिले के बिजौर गाॅव में एक कब्र है जो लैला-मजनू की है। लैला-मजनू के प्यार की कहानी- यह कहानी उस समय की है जब लोग एक दूसरे से प्यार करना गुनाह समझते थे अगर कोई भी लडका या लडकी किसी से प्यार करती तो उसके साथ कडी कारवायी करते और सीधे जेल मे डाल देते थे।  अमारी शाह के बेटे मजनू जब पैदा हुए तो लोगो के खुशी का ठिकाना नही रहा कहा जाता है कि जब उस समय किसी को बेटा या बेटी जन्म लेते थे तब उनके हाथ की रेखा ज्योतषियो को दिखाया जाता था जब अमारी शाह ने अपने बेटे के हाथ की रेखा ज्योतषी से

हचिको कौन था? प्रोफेसर यूनो और हाचिको की कहानी

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                हचिको और प्रोफेसर यूनो की कहानी   हचिको कौन था? हचिको एक बहुत ही वफादार कुत्ता था जो अपने मालिक के लिए अपनी जान को भी गवा देता है। दरअसल यह अपने मालिक को एक पप्पी के रूप में मिला था। यह जापान का रहने वाला था। इसे छोटे पर ही बेचने के लिए दूसरे मे ले जाया जा रहा था और रास्ते मे इस पप्पी का पिजडा गिर गया और यह एक यूनो नाम के एक एग्रीकल्चर साइंस प्रोफेसर को मिला। जो उस पप्पी को उसके बड़े होने तक पालते रहे। हचिको और प्रोफेसर की कहानी-- यह कहानी सन् 1924 की है यूनो नाम के एक एग्रीकल्चर प्रोफेसर थे। वह एक ईजीबूरो नाम के देश में लेक्चरर थे। दरअसल वे एक अटिका ब्रीड के एक कुत्ते को पालना चाहते थे। वे अपना कुछ पल पालतू डाॅग के साथ व्यतीत करना चाहते थे। एक दिन प्रोफेसर लेक्चरर देने के लिए ईजीबूरो जा रहे थे तब रास्ते में वे कुत्ते बेचने वाले गाडी को देखा, दरअसल उस गाडी में पपी थे वे पपी हाचिको अटिका ब्रीड के थे और प्रोफेसर को उन्ही डाॅग में से एक की जरूरत थी तभी एक पपी का पिजडा गाडी से नीचे गिर गया और प्रोफेसर ने उस पपी को उठा लिया और अपने घर वापस आ गये प्रोफेसर के घर आने से पपी रोज

Real sad love story in hindi (अधूरी कहानी)

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  यह एक सच्ची प्रेम कहानी है जो की अधूरी रह गयी इसे पढने के बाद आपकी ऑखो में आसूं आ जायेगें। एक लडका था उसका नाम विकास था वह मोबाइल चलाने का बहुत शौकीन था। कई बार उसकी माॅ उसे मोबाइल चलाने से मना भी करती लेकिन वह नही मानता और दिनभर मोबाइल से फेसबुक, ट्वीटर चलाता रहता था। एक दिन वह फेसबुक मे एक लडकी को फ्रेन्ड रिक्वेस्ट भेजा लडकी विकास के फ्रेन्ड रिक्वेस्ट को स्वीकार कर लेती है और अब दोनो लोग एक दूसरे से बाते करना शुरू कर देते है। विकास रोज उस लडकी से बाते करता और लडकी से बाते करके वह खुश रहता था। एक दिन ऐसा आया, विकास को उस लडकी से प्यार हो गया और वह उस लडकी को purpose करना चाहता था। लडकी उससे काफी दूर रहती थी इसलिए विकास उस लडकी से मिलकर अपने प्यार का इजहार करना चाहता था। कुछ महीनो तक विकास उस लडकी से बात किया लडकी भी लडके से बात कर खुश रहती थी वह भी विकास को पसंद करने लगी थी दरअसल वे दोनो एक दूसरे को नही देखे थे। एक दिन लडका उस लडकी को एक पार्क में बुलाया लडकी वहा कुछ देर मे पहुच गयी अब विकास उस लडकी को purpose कर दिया। उनकी दोस्ती कब प्यार में बदल गया उन्हे पता ही नही चला। अब लडका उ

Sad Love Story in hindi, Emotional Love story

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                   यह एक दुख भरी प्रेम कहानी Sad Love Story हैं। जो एक लडके और लडकी से शुरू होती हैं।  एक दिन लडका एक पार्क में उदास मन से बैठा हुआ था वह किसी का इतंजार कर रहा होता हैं। दरअसल वह एक लडकी का इतंजार कर रहा होता है। कुछ देर वह लडकी का इतंजार करता लेकिन वह लडकी वहाॅ नही आती है। फिर लडका वहा से चला जाता है अगले दिन वह फिर अपनी Sad Love story को लेकर उसी पार्क में उसका इतंजार कर रहा होता हैं। दरअसल वह लडकी से बहुत प्यार करता था। किसी कारण वश वह लडके से दूर हो जाती हैं।  यह बात दो साल पहले की है एक दिन लडका उसी पार्क में अपने दोस्तो के गलत व्यहार से रूठ कर बैठा हुआ था उसके दोस्त उस लडके से नफरत करते थे क्योकि वह अपने दोस्तो को पार्टी देने के लिए उसके पास पैसे नही थे इसलिए लडके के दोस्तो ने उसे अपने ग्रुप से निकाल दिए थे। जब वह उस पार्क मे बैठा हुआ था तभी उसके सामने से एक खुबसूरत लडकी गुजरती है वह लडकी को अच्छे से नही देख पाता है कुछ देर बाद फिर वही लडकी आकर उसके पास बैठ जाती है लडका उसे देखने लगता है फिर उसे पहचान लेता है। दरअसल लडकी भी उदास होकर आयी थी और लडके से कुछ भी नही

Heart touching Love Story in hindi

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कई साल पुरानी बात है। एक लडका था, वह काफी अच्छा और आकर्षित दिखता था इसके साथ-2 वह पढा-लिखा था वह एक कालेज में पढाई भी करता था वह खूब मन लगाकर पढता और आगे कुछ बनना चाहता था। वह एक छोटे से शहर से belong करता था। एक दिन वह अपने स्कूल जा रहा था कि उसके मोबाइल पर एक अंजान नम्बर से फोन आया वह उस call को receive नही करना चाहता था लेकिन उसका दिल नही माना और call को उठा लिया वह अपने मोबाइल से एक लडकी के voice को सुना और तुरन्त फोन कट गया  लडका तुरन्त उदास हो गया।                         उसका उदास होना जायज था क्योकि लडकी की आवाज बहुत ही मधुर और सुरिली था और सबसे अलग बात यह था कि वह उसे बिना जाने अपने दिल में जगह दे दिया और उसे अपना बनाने की सोचने लगा अब उसका मन पढाई से भी हटने लगा और लडकी को याद करने लगा अब उसके ख्यालो में खोया रहता था क्योकि जब भी लडका उसके पास फोन लगाता तब उसे कोई जवाब नही मिलता था वह उसके प्यार में पागल सा हो गया था। एक दिन जब वह उसके ख्यालो में खोया था तभी अचानक उसके फोन में एक रिंग की आवाज सुनायी पड़ी वह दौडता हुआ अपने फोन के पास गया क्योकि वह उसे Very Emotional Love करने ल

One Sided Love Story and 5 Painful Quotes in hindi

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एक समय की बात है एक कालेज में अलोक व शिवानी नाम के students पढते थे। शिवानी कालेज की topper थी और अलोक पढने में कमजोर था। अलोक शिवानी से बहुत प्यार करता था लेकिन शिवानी उसे नही चाहती थी। अलोक उससे one side love करता था क्योकि शिवानी उसे पसंद नही करती हालांकि वह अलोक अच्छा लडका था लेकिन पढने में कमजोर था इसलिए वह अलोक को पसंद नही करती थी। शिवानी का अलोक को न चाहने से उसका दिल धीरे-2 टूट रहा था वह सोचता था कभी न कभी शिवानी उसे जरूर पसंद करेगी। अलोक शिवानी से अपने प्यार का इजहार भी नही किया था वह शिवानी को purpose करने से डरता था?एक दिन अलोक कालेज नही गया और रास्ते में शिवानी का इतंजार कर रहा था  जब कालेज की छुट्टी हुई तो रास्ते में  अलोक ने शिवानी को purpose करने की सोच रहा था और जब शिवानी उसके पास पहुची तो वह डरते -2 शिवानी को अपने प्यार का इजहार किया यह सुनकर शिवानी गुस्से से देखने लगी। अलोक ओर भी डर गया। फिर शिवानी बोली मै किसी ओर से प्यार करती हूॅ यह सुनकर अलोक का दिल टूट गया फिर भी उसका दिल यह मानने को तैयार नही थी और उसके ऑख में ऑसू आ गया और फिर शिवानी वहा से चली गयी। अलोक भी वहा स